फ़ोटो AI से बनाया हुआ है
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| फ़ोटो AI से बनाया हुआ है |
समिति के अनुसार, निजीकरण के दुष्परिणाम अन्य राज्यों में सामने आ चुके हैं। उड़ीसा का उदाहरण देते हुए बताया गया कि आपदा के समय निजी कंपनियां पीछे हट जाती हैं, जबकि सरकारी तंत्र ही व्यवस्था संभालता है। वहीं राजस्थान के कोटा, बीकानेर व भरतपुर जैसे शहरों में फ्रेंचाइजी मॉडल भी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा।
संघर्ष समिति का कहना है कि डिस्कॉम का घाटा कर्मचारियों के कारण नहीं, बल्कि नीतिगत खामियों, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के कारण हुआ है। कर्मचारियों के प्रयासों से AT&C लॉस में कमी आई है और वर्ष 2023 में जोधपुर डिस्कॉम ने अपनी स्थिति में सुधार भी किया है।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार 30 अप्रैल को शास्त्री सर्कल से प्रबंध निदेशक कार्यालय तक रैली निकाली जाएगी। इसमें फलोदी सहित विभिन्न वृतों के कर्मचारी-अधिकारी भाग लेंगे। फलोदी से सह संयोजक करन सिंह राजपुरोहित, जिला संयोजक फिरोज खान, हनुमान राम चौधरी, ओमप्रकाश जयपाल, अरविंद पवार, प्रेमराज जांगिड़, राम देवड़ा, कपूरचंद माली, हनुमान खिलेरी, ओमप्रकाश विश्नोई सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल होंगे।
