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एक हजार से भी अधिक महिलाओं को सैनेट्री नैपकिन्स वितरण किये

दूसरा दशक ने महिलाओं की पीड़ा को समझा Bap News :  पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना महामारी की मार झेल रही है। कई दिनों से चल रहे लाॅकडाउन के कार...

दूसरा दशक ने महिलाओं की पीड़ा को समझा

Bap News : पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना महामारी की मार झेल रही है। कई दिनों से चल रहे लाॅकडाउन के कारण ग्रामीण महिलाओं व किशोर उम्र की लड़कियों को अपनी निजी जरूरतों के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ा। इन महिलाओं व किशोरियों को माहवारी के दौरान प्रयुक्त होने वाले सैनेट्री नैपकिन्स की उपलब्धता नहीं के बराबर रही। आंगनवाड़ी, स्कूलों में इन सैनेट्री नैपकिन्स का निःशुल्क वितरण किया जाता है। लेकिन लाॅकडाउन के चलते सैनेट्री नैपकिन्स का वितरण नहीं हो सका। महिलाओं व किशोरियों की पीड़ा को दूसरा दशक ने समझा और इसके लिए पहल कर बाप व फलोदी उपखण्ड के 32 गांव-ढाणियों में सैनेट्री नैपकिन्स उपलब्ध कराए।
दूसरा दशक की फील्ड काॅर्डिनेटर प्रीति राठौड़ ने बताया कि महिलाओं के साथ फोन पर निरन्तर संपर्क रखने तथा जागरूकता के लिए की गई फील्ड विजिट के दौरान महिलाओं ने अपनी समस्याएं बताई और सैनेट्री नैपकिन्स उपलब्ध कराने की मांग की। इन महिलाओं की मांग को ध्यान में रखकर काफी संख्या में सैनेट्री नैपकिन्स बाजार से क्रय कर महिलाओं व किशोरियों को उपलब्ध कराये गए। मांग बढ़ने पर ब्लाॅक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बाप व फलोदी, बाप के खण्ड शिक्षाधिकारी व प्राचार्यों से सम्पर्क किया गया। इन सभी ने निःशुल्क वितरित किये जाने वाले सैनेट्री नैपकिन्स सहर्ष उपलब्ध करा दिये।

विभिन्न प्रदेशों एवं राजस्थान के कई जिलों के मजदूर बाप-फलोदी क्षेत्र में फंसे हुए थे। इन अप्रवासी मजदूर परिवारों की महिलाओं व किशोरियों को सैनेट्री नैपकिन्स के अभाव में बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ रहा था और वे अपनी समस्या भी किसी को नहीं बता पा रही थी। ऐसे में दूसरा दशक की महिला कार्मिक द्वारा उनके साथ बातचीत करने से उन्हें लगा कि अब उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। फलोदी के आईजीएनपी स्कूल के शैल्टर होम तथा पशु मेला मैदान, भड़ला के यूनियन चैराहा, नूरे की भुर्ज चैराहा आदि जगहों पर रह रहे मजदूर परिवारों की महिलाओं व किशोरियों ने सैनेट्री नैपकिन्स पाकर राहत की सांस ली। इनके अलावा राह चलते प्रवासियों की महिलाओं व किशोरियों को भी सैनेट्री नैपकिन्स का वितरण किया गया। इस कार्य में मनु बाई, नीलम रानी, कंचन थानवी, अमरू चैधरी, कैलाश कंवर, सुशीला, पूजा ओड, बशीरों तथा गांव में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व महिला समूह की सदस्यों ने सहयोग किया। साथ ही दूसरा दशक से प्रशिक्षित अनेक किशोरियां भी इस कार्य में सहयोग कर रही हैं।

इसी प्रकार प्रवासी मजदूर व उनके साथ आए बच्चे व्यस्त रहे इसके लिए फलोदी के आईजीएनपी स्कूल के शैल्टर होम में करीब 250 पुस्तकालय की पुस्तकें, चित्रकारी के लिए ड्राॅईंग बुक, चार्ट्स के साथ कलर्स तथा भोजन करने के लिए 200 छोटी थालियों की व्यवस्था की गई।

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