बाप न्यूज़ | रमन दर्जी थार के रेगिस्तान में राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण की दिशा में रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। सम क्षेत्र स्थित ड...
थार के रेगिस्तान में राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण की दिशा में रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। सम क्षेत्र स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क की सूदासरी रेंज में पहली बार कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार किए गए दो गोडावणों को प्राकृतिक पर्यावास में स्वतंत्र रूप से रिलीज किया गया। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में दोनों गोडावणों ने प्राकृतिक वातावरण में आजादी की उड़ान भरी। इस दौरान वन राज्य मंत्री संजय शर्मा, डीजी फॉरेस्ट संतोष तिवारी सहित वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
ब्रीडिंग सेंटर से प्राकृतिक पर्यावास तक पहली उड़ान
गोडावण संरक्षण अभियान में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ब्रीडिंग सेंटर में नियंत्रित वातावरण में तैयार किए गए गोडावणों को पहली बार सीधे प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ा गया है। रिलीज से पहले दोनों गोडावणों को करीब दो से तीन महीने तक री-वाइल्डिंग टनल में रखा गया, जहां उन्हें प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार किया गया। इस दौरान उन्हें खुले वातावरण में उड़ान भरने, स्वयं भोजन तलाशने और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यवहार करने का अभ्यास कराया गया। स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी परीक्षणों में स्वस्थ पाए जाने के बाद दोनों गोडावणों को प्राकृतिक पर्यावास में रिलीज किया गया।
GPS टैग से हर गतिविधि पर रहेगी नजर
रिलीज किए गए दोनों गोडावणों को GPS टैग लगाया गया है। इसके माध्यम से भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक उनकी गतिविधियों की 24 घंटे निगरानी करेंगे। GPS से उनकी लोकेशन, उड़ान, भोजन की तलाश, मूवमेंट, सुरक्षित ठिकानों और प्राकृतिक व्यवहार से जुड़ी जानकारी लगातार जुटाई जाएगी। विशेष रूप से हाईटेंशन बिजली लाइनों वाले क्षेत्रों में उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। शिकारियों से संभावित खतरे के साथ ही अन्य प्राकृतिक और मानवीय जोखिमों की भी निगरानी की जाएगी, ताकि रिलीज के बाद गोडावणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
भविष्य की संरक्षण रणनीति में काम आएगा डेटा
GPS के जरिए जुटाया जाने वाला वैज्ञानिक डेटा गोडावणों के प्राकृतिक व्यवहार और नए पर्यावास में उनके अनुकूलन को समझने में महत्वपूर्ण होगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कैप्टिव ब्रीडिंग से तैयार गोडावण प्राकृतिक परिस्थितियों में किस तरह रह रहे हैं, किन क्षेत्रों में अधिक समय बिता रहे हैं और उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी डेटा के आधार पर भविष्य में ब्रीडिंग सेंटर से तैयार होने वाले अन्य गोडावणों को भी प्राकृतिक पर्यावास में रिलीज करने की रणनीति तैयार की जाएगी।
करीब एक दशक की मेहनत के बाद मिली सफलता
गोडावण संरक्षण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान और वन विभाग पिछले करीब एक दशक से लगातार प्रयास कर रहे हैं। कैप्टिव ब्रीडिंग, वैज्ञानिक निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण और री-वाइल्डिंग की लंबी प्रक्रिया के बाद अब पहली बार ब्रीडिंग सेंटर में तैयार गोडावणों को प्राकृतिक पर्यावास में छोड़ने का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। सूदासरी में हुई यह रिलीज थार के संकटग्रस्त राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण अभियान में नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। यदि दोनों गोडावण प्राकृतिक पर्यावास में सफलतापूर्वक अनुकूलित होते हैं और सुरक्षित रूप से जीवनयापन करते हैं, तो यह भविष्य में कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए तैयार गोडावणों की संख्या बढ़ाकर उन्हें प्राकृतिक पर्यावास में बसाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकता है।
