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छह वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित थे, लेकिन जीती 10 महिलाएं

आरक्षण से आगे निकली आधी आबादी, बाप की नई पालिका में 50% महिला प्रतिनिधित्व रमन दर्जी  नगर पालिका चुनाव का परिणाम केवल भाजपा, कांग्रेस और निर...


आरक्षण से आगे निकली आधी आबादी, बाप की नई पालिका में 50% महिला प्रतिनिधित्व

रमन दर्जी 

नगर पालिका चुनाव का परिणाम केवल भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीयों के बीच सीटों के बंटवारे की कहानी नहीं है। इस चुनाव ने बाप की राजनीति में एक और तस्वीर सामने रखी है, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और मतदाताओं का उन पर भरोसा। 20 वार्डों वाली बाप नगर पालिका में आरक्षण के अनुसार महिलाओं के लिए छह वार्ड आरक्षित थे। इनमें सामान्य महिला के वार्ड 10, 12, 18 और 19, ओबीसी महिला का वार्ड 13 तथा एससी महिला का वार्ड 16 शामिल था। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद तस्वीर आरक्षण की सीमा से काफी आगे निकल गई। 20 में से 10 महिलाएं पार्षद निर्वाचित हुईं। यानी नगर पालिका के सदन में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत हो गई। यह संख्या इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब नगर पालिका में 10 महिला और 10 पुरुष पार्षद बैठेंगे। दोनों की संख्या बराबर है। यानी बाप के नए बोर्ड में महिलाओं की आवाज अब सदन की आधी ताकत के साथ सामने आएगी।

महिला आरक्षण के छह वार्ड, लेकिन जीत 10 महिलाओं की

आरक्षित छह वार्डों में महिलाओं की जीत तो हुई ही, इसके अलावा चार ऐसे वार्ड भी रहे जो महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं थे। वार्ड 3, 4, 11 और 20 में महिलाओं ने सामान्य मुकाबले में जीत हासिल की। वार्ड 3 में मैना मेघवाल, वार्ड 4 में प्रेम पूजा परमार, वार्ड 11 में कविता और वार्ड 20 में लता पालीवाल ने जीत दर्ज की। इन मुकाबलों की खास बात यह रही कि महिला प्रत्याशियों ने भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों के सामने चुनाव जीता। यानी इन चार वार्डों में महिलाओं की जीत केवल आरक्षण का परिणाम नहीं थी। मतदाताओं ने सामान्य चुनावी मुकाबले में उन्हें वोट देकर प्रतिनिधि चुना

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू एससी आरक्षण के परिणाम में दिखाई देता है। बाप नगर पालिका में एससी के कुल चार वार्ड—3, 4, 11 और 16 आरक्षित थे। इनमें वार्ड 16 एससी महिला के लिए आरक्षित था, जबकि वार्ड 3, 4 और 11 सामान्य एससी सीटें थीं।परिणाम आया तो चारों सीटों पर महिलाएं जीतकर सामने आईं। वार्ड 16 से नीलम, जबकि वार्ड 3 से मैना मेघवाल, वार्ड 4 से प्रेम पूजा परमार और वार्ड 11 से कविता निर्वाचित हुईं। यहां एक राजनीतिक पहलू महत्वपूर्ण है। इस बार नगर पालिका अध्यक्ष का पद भी एससी महिला के लिए आरक्षित था। ऐसे में एससी वर्ग की महिलाओं के लिए राजनीतिक दावेदारी का माहौल बना। इसका असर केवल एससी महिला आरक्षित वार्ड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामान्य एससी वार्डों में भी महिलाओं ने पुरुष प्रत्याशियों को पीछे छोड़ दिया। इसे केवल आरक्षण की उपलब्धि कहना भी अधूरा होगा। क्योंकि वार्ड 3, 4 और 11 में महिला प्रत्याशियों को मतदाताओं ने सामान्य एससी मुकाबले में चुना है।

10 महिलाओं की उम्र और शिक्षा भी अलग कहानी कहती है

बाप के नए बोर्ड में शामिल 10 महिलाओं की पृष्ठभूमि भी एक जैसी नहीं है। कविता 25 वर्ष की हैं और एमए, बीएड शिक्षित हैं। लता पालीवाल 36 वर्ष की हैं और एमए, बीएड तथा आरएस-सीआईटी कर चुकी हैं। मैना मेघवाल 26 वर्ष की हैं और 12वीं पास हैं। प्रेम पूजा परमार 30 वर्ष की हैं और एमए शिक्षित हैं। वहीं वार्ड 16 से निर्वाचित और बाद में पालिकाध्यक्ष बनीं नीलम स्नातक हैं और उनकी उम्र 44 वर्ष है। देवी पालीवाल 23 वर्ष की 12वीं पास हैं। लीला देवी 54 वर्ष की 8वीं पास हैं। शांति सोनी 53 वर्ष की साक्षर हैं। गीता पालीवाल 59 वर्ष की साक्षर और लूणी देवी 63 वर्ष की साक्षर हैं। यानी सदन में युवा चेहरे भी हैं और अनुभव वाली महिलाएं भी। शिक्षा का स्तर भी अलग-अलग है। यह विविधता नगर पालिका के कामकाज में अलग-अलग अनुभव और सोच को जगह दे सकती है।

एक स्थानीय बेटी, बाकी बहुओं की कहानी

इन 10 महिला पार्षदों की सामाजिक पृष्ठभूमि में भी एक रोचक तथ्य है। कविता को छोड़कर बाकी सभी स्थानीय परिवारों की बहुएं हैं। इसका मतलब यह है कि बाप की सामाजिक संरचना में बाहर से आई बहुओं ने भी स्थानीय राजनीति में अपनी जगह बनाई और मतदाताओं का भरोसा हासिल किया। यह स्थानीय निकाय चुनावों की उस राजनीति को भी दिखाता है, जहां परिवार, समाज, व्यक्तिगत संपर्क और वर्षों का वार्ड स्तर का जुड़ाव पार्टी के नाम के साथ-साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अब असली परीक्षा सदन के भीतर

चुनाव ने महिलाओं को संख्या दी है। अब चुनौती इस संख्या को सार्थक प्रतिनिधित्व में बदलने की है। बाप के नए बोर्ड में 10 महिला पार्षद होंगी। उनके सामने भी वही समस्याएं होंगी जो पूरे कस्बे के सामने हैं, सफाई, नालियां, सड़कें, पेयजल, बिजली, सीवरेज और वार्ड स्तर के विकास कार्य। मतदाताओं ने उन्हें प्रतिनिधित्व दिया है। अब जनता यह देखना चाहेगी कि ये महिला पार्षद अपने वार्ड की समस्याओं को कितनी मजबूती से नगर पालिका के सामने रखती हैं और कितने काम जमीन पर उतरते हैं।