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जांभोजी की वाणी में पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण की सीख मिलती है

Bap New s:  गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोधपीठ जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर एवं जांभाणी साहित्य अकादमी बीकानेर के संयुक्त तत्वावधा...

Bap News: गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोधपीठ जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर एवं जांभाणी साहित्य अकादमी बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का समापन हुआ। शोधपीठ के निदेशक प्रो.जेताराम विश्नोई ने बताया कि कोराेना महामारी के कारण सेमीनार का आयोजन ऑनलाइन किया गया। 
उन्होंने बताया कि इस वेवीनार देश के विदेश के तीन हजार से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया और हजारों लोगों ने ऑनलाइन सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। आयोजन सचिव सुरेंद्र कुमार व महेश धायल ने बताया की मुख्य समारोह में जूम एप के माध्यम से बोलते हुए राजस्थान के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री सुखराम विश्नोई ने कहा कि गुरू जांभोजी ने आज से साढे पांच सौ साल पहले ही पर्यावरण संरक्षण की चिंता करते हुए अपने अनुयायियों से इसके संरक्षण की बातें कह दी थी। जांभोजी द्वारा प्रतिपादित किये गये 29 नियमों में पर्यावरण एवं वन्य जीव संरक्षण पर विशेष जोर  दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी लोगाें को प्रकृति के संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। विश्नोई ने कहा कि वन विभाग के माध्यम से वन संपदा को बचायें रखने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है।
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रवीणचंद त्रिवेदी ने कहा कि हमें अरण्य संस्कृति की ओर लौटना होगा। गुरू जांभोजी की शिक्षाओं  से पर्यावरण संरक्षण तथा संर्वद्धन हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षण पाठयक्रमों में पर्यावरण से संबंधित शिक्षण सामग्री को पढाया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य वाले का सम्मान करने के लिए गुरू जंभेश्वर पर्यावरण पुरस्कार प्रदान करने की पहल करेगा।
लूणी विधायक महेंद्र विश्नोई एवं लोहावट विधायक किसनाराम विश्नोई ने कहा कि विश्नोई समाज के लोग सैकड़ो सालों से पर्यावरण एवं वन्यजीवों की रक्षा के लिए तत्पर रहकर कार्य रहे है। उन्होंने कहा की पर्यावरण की रक्षा से ही प्रकृति की रक्षा हो सकेगी। विश्नोई ने कहा कि शोध पीठ का हरसंभव सहयोग प्रदान किया जायेगा। 
आयोजन सचिव सुरेंद्र कुमार ने बताया कि समापन दिवस पर स्वामी कृष्णानंद आचार्य, डॉ.सरस्वती विश्नोई, पदमश्री अनिल प्रकाश जोशी,  प्रोफेसर अनिल जैन, पूर्व कुलपित डॉ. वेदप्रकाश आचार्य, इंजीनियर आरके विश्नोई, फ्रैंक वोगल, प्रोफेसर ब्रजेश कुमार दुबे, विधायक अजय कुमार विश्नोई, डॉ.ओपी यादव, डॉ.सुमित डूकिया, डॉ.बीकू राठौड़, प्रोफेसर अशोक पुरोहित, पूर्व सांसद जसवंतसिंह विश्नोई, डॉ.एमआर बालोच, प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार, यानसून चूंग, बीआर डेलू , इंदिरा विश्नोई, महेश धायल सहित कई वक्ताओं ने विचार प्रकट किये। वेबीनार में अपने  विचार प्रकट करते हुए विद्वानों ने कहा कि गुरू जांभोजी ने आज से साढे पांच सौ साल पहले ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर बात कही थी। गुरू जांभोजी एक महान पर्यावरणविद थे। 
कानपुर के पूर्व विधायक सलील विश्नोई ने कहा कि जिस प्रकार से वायु, अग्नि देवता होते है। उसी प्रकार से जांभोजी को भी पर्यावरण का देवता के रूप में स्वीकार करना चाहिये। उन्होंने कहा कि आज मानव द्वारा किये जा रहे पर्यावरण क्षरण के कारण ही विभिन्न आपदाओं का हमें सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को पौधरोपण में जनभागीदारी बढानी चाहिये। फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की भावना विश्नाेई समाज के धर्म में है। खेजड़ली बलिदान का जिक्र प्रधानमंत्री भी कर चुके है। गुरू जांभोजी का अवतरण समाज के हितों व पर्यावरण संरक्षण के लिए हुआ था। जांभोजी ने आज से पांच सदी पूर्व ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों को आगाह किया था। 
आयोजन सचिव सुरेंद्र कुमार ने बताया कि दूसरे दिन डॉ करूणाशंकर उपाध्यय, प्रोफेसर कृपाराम विश्नोई, डॉ. पीएच इब्राहीम कुटटी, प्रोफेसर अशोक सभरवाल, प्रोफेसर बाबूराम, डॉ. श्यामसुंदर जाणी, ग्रीनमैन विजयपाल बघेल, प्रोफेसर कैलाश कौशल तथा अमरचंद विश्नोई ने अपने विचार प्रकट किये। जांभोजी की साखी वंदना के साथ वेबीनार शुरू किया गया। जांभाणी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष कृष्णानंद आचार्य ने कहा कि मानव को सांस लेने के शुद्ध वातावरण चाहिये। पर्यावरण दुषित होने के कारण विभिन्न आपदायें आ रही है। प्रोफेसर जेताराम विश्नोई ने कहा कि तीन दिवसीय पर्यावरण संवाद श्रृखंला की शुरूआत हुई है। मानव ने भौतिक सुविधाओं के लिए प्रकृति का दोहन किया है। डॉ.राजेंद्र कुमार पुरोहित ने खेजड़ी वृक्ष के महत्व के बारे में बताया। 
नोखा विधायक बिहारीलाल विश्नोई कहा कि गुरू जांभोजी ने 29 नियमाें से जीवन जीने की पद्धति को शामिल किया। उन्नतीस नियमों का आज भी वैज्ञानिक महत्व है। हमें आज इस आपदा के समय गुरू जांभोजी की पर्यावरण संरक्षण की बात की पालना विशेष रूप से करना चाहिये तभी प्रकृति हमारी मित्र हो सकेगी व हमारी रक्षा कर सकेगी। 
इसके साथ ही  प्रोफेसर लक्ष्मी अय्यर, प्रोफेसर सराेज कौशल, प्रोफेसर मदन खीचड़, डॉ. राजेंद्र पुरोहित, पूर्व संसदीय सचिव लादूराम विश्नोई, प्रोफेसर कृष्ण कुमार कौशिक, वैज्ञानिक गजेंद्रसिंह, डॉ. दिनेश चहल, डॉ.हेमू चौधरी, संत आचार्य डॉ.गोवर्धनराम, दरियासिंह यादव निदेशक तकनीकी शिक्षा, डॉ. सुमन कुमावत सिंगापुर, डॉ.हेमसिंह गहलोत सह आचार्य तथा डॉ.प्रीति विश्नोई ने वेबीनार पर संबोधन दिया।  सांय को कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रो. कैलाशनाथ उपाध्याय, साहित्यकार डॉ. आईदानसिंह भाटी, डॉ.कृष्णलाल बिश्नोई, रामस्वरूप झंवर, अकादमी के प्रवक्ता विनोद जम्भदास, गुरु जम्भेश्वर सेवक दल के महासचिव रंगलाल बिश्नोई, सुरेन्द्र सुन्दरम्, मांगीलाल अग्रवाल, बंशीलाल ढ़ाका, कवि पृथ्वीसिंह बैनीवाल बिश्नोई कवि, जयकिशन खिलेरी, डॉ. संतोष बिश्नोई,  उदाराम खिलेरी, डॉ. बंशीलाल दर्जी,  रामनिवास बागड़िया, डॉ.हरिराम बिश्नोई बीकानेर, अशोक बिश्नोई, भागाराम लोल, शंकरलाल बिश्नोई, लीलाधर सोनी, राजेन्द्र स्वर्णकार,  छोगाराम बांगड़वा और चन्द्रभान बिश्नोई आदि ने भाग लिया।

फलोदी से अशोक कुमार मेघवाल की रिपोर्ट




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