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तपते थार में उगा दिया आम, बैलगाड़ी पर पानी लाकर सींचे पौधे

चीकू, नारियल, संतरा सहित कई प्रकार के पौधो पर लग रहे फल बाप न्यूज़ ◆ बाप क्षेत्र तपते थार में शुमार है। यहां गर्मियों में कई बार पारा 50 डिग्...

चीकू, नारियल, संतरा सहित कई प्रकार के पौधो पर लग रहे फल



बाप न्यूज़ ◆ बाप क्षेत्र तपते थार में शुमार है। यहां गर्मियों में कई बार पारा 50 डिग्री सेल्सियस से बाहर चला जाता है। बावजूद इसके घटोर गांव निवासी बालम खान ने पर्यावरण के प्रति अपने जुनून और मेहनत के पसीने से सींच कर थार में आम के पौधे विकसित कर दिये है। पथरीली व रेतीली जमीन में आज उसकी बगिया में 18 आम के पौधे तैयार हो गए है। इनमें आधा दर्जन पौधों पर आम लग भी रहे है। इसके अलावा नारियल, चीकू, बादाम, संतरा, अमरूद सहित कई प्रकार के पौधे भी लगाये हुए है। सभी पौधे देशी खाद से विकसित किये गए है। बालम खान की चार बीघा में बनाई फलदार पौधों की बगिया काे देख यहां के लोग हैरान हो जाते है। 

थार का वातावरण सूखा और गर्म होने की वजह से आम के पेड़ यहंा पैदा नहीं होते। मगर बालम खां की मेहनत से आम के पौधे पेड़ में बदल चुके है। बालम खां ने बताया कि उन्हे शुरू से ही पौधों से लगाव रहा है। किंतु पानी की कमी व तेज गर्मी की वजह से फलदार पौधे लगाना बड़ी चुनौती भरा काम था। उन्होने बताया कि 2005 – 2006 में एक एनजीओ ने उसे 9 पौधे दिये थे। 3 गूंदा, 3 नींबू व 3 बेर के पौधे थे। परिवार के सहयोग से सभी पौधे पनप गये। 

10 हजार में खरीदे 24 पौधे

एनजीओ के पौधे विकसित हाेने पर बालम खां का थोड़ा हौसला बढ गया। 2008 – 09 में फलोदी में महाराष्ट्र से कोई पौधे बेचने आया था। बालम खान ने बताया कि पौधे वाले के पास कई फलदार पौधे भी थे। इनमें कई बिक चुके थे। पौधे वाले से उन्होने आम, अमरूद, चीकू, कागजी नींबू, बादाम सहित कई अन्य 24 फलदार पौधे लेने के लिए उसने करीब 10 हजार रूपये दिये। एडवांस में रकम देने पर घरवाले काफी नाराज भी हुए, लेकिन पौधेवाले ने सप्ताह भर बाद पौधें पहुुंचा ही दिये। 

पौधो में दे रहे केवल बकरियों की मेंगनी की खाद

बालम खान ने बताया कि पौधे लगाने के बाद सबसे बड़ी समस्या पानी की सामने आई। लेकिन उन्होने हिम्मत नहीं हारी। बैलगाड़ी पर 3 – 4 किमी दूर से प्रतिदिन 2 – 3 बार पानी लाकर पौधो को पिलाया। यह सिलसिला करीब 7 साल तक चला। अब पानी की समस्या नहीं है। खाद के रूप में केवल बकरियों की मेंगनी से बनी खाद ही दी। आज भी वह पौधो को केवल बकरी खाद ही डालते है। यही कारण रहा कि कभी किसी पौध विशेषज्ञ की सलाह तक नहीं लेनी पड़ी। 

सभी पौधे विकसित हो गए। आज चार बीघा में फैली उसकी बगिया में 18 आम, 16 चीकू, 15 संतरा, 1 शहतूत, 40 खजूर, 5 अनार, 10 अमरूद, 20 कागजी नींबू, 4 काले जामून, 3 बादाम, मीठा नीम, पपीता सहित कई प्रकार के पौधे लहलहा रहे है। गर्म वातावरण के बावजूद आम के पौधे पनपने के साथ फल भी दे रहे है। इसके अलावा 10 बतख, 10 खरगोश व एक सफेद कबूतर का जोड़ा भी है, जिन्हे वह बच्चों की भांति पाल रहा है।  बालम खा के पौधे लगाने की जिद से महकी फलदार पौधों की बगिया कई पर्यावरण प्रेमियों के लिए प्रेरणास्त्राेत बन सकती है।



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