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पिंजरा पोल का ऋषि गोपाल गौशाला की टीम ने किया

Bap News : अशोक कुमार मेघवाल, फलोदी फलोदी उपखंड मुख्यालय पर राईका बाग स्थित श्री ओसवाल गौ सेवा सदन पिंजरा पोल का मंगलवार को ॠषि गोपाल गौशाला...

Bap News : अशोक कुमार मेघवाल, फलोदी

फलोदी उपखंड मुख्यालय पर राईका बाग स्थित श्री ओसवाल गौ सेवा सदन पिंजरा पोल का मंगलवार को ॠषि गोपाल गौशाला बाप के प्रतिनिधि मंडल ने शैक्षणिक भ्रमण कर जानकारी जुटाई। इस अवसर पिंजरा पोल के मुख्य द्वार पर कुमकुम तिलक एवं माला से प्रतिनिधि मंडल का स्वागत किया गया एवं उन्हें गौशाला का भ्रमण करवाया गया।


डॉ.उमेश के नेतृत्व में आई टीम ने पिंजरा पोल गौशाला में शैक्षणिक भ्रमण किया। गौशाला के प्रांगण में उगाई गई नेपियर घास एवं सेवण घास का अवलोकन किया,उसे उगाने तथा उसके गुणों के बारे में बातचीत की, डॉ.उमेश को बताया गया की जोधपुर के काजरी अनुसंधान केंद्र से अक्टूबर 2019 में मुंबई की स्वयंसेवी संस्था समस्त महाजन के सहयोग से इस की पौधे को लाकर यहां लगाया गया था। उसके बाद से अब तक एक वर्ष में 20 से अधिक किसानों को यहां से इसकी पौध उपलब्ध करवाई है,यह गायों के खाने के लिए पौष्टिक है इसमें गाय का गोबर और गोमूत्र  दिया गया है किसी प्रकार का कोई रसायन इसमे नही डाला गया है। 

नेपियर घास की यह विशेषता है कि इसे लगाने के बाद 5 साल तक इसकी कटिंग लेते रहे, इसको बार-बार लगाने की आवश्यकता नही रहती है। नेपियर के विषय में गौशाला के द्वारा दी गई जानकारी से संतुष्ट होकर बाप गोशाला से आये प्रतिनिधि मंडल ने अपनी गौशाला में तथा अपने स्वयं के खेत में लगाने के लिए हाथी घास की पौध मांगी जो कि समस्त महाजन के कार्यकर्ताओं के द्वारा उनको हाथो- हाथ उपलब्ध करवाई गई। सेवण घास को रेगिस्तान का सोना कहा जाता है।पोषक तत्वों से भरपूर यह घास गायों के खाने के लिए अत्यंत ही उपयोगी है इस घास के बीज को एक बार लगाने के बाद 50 साल तक यह पौधा घास देता रहता है। राजस्थान के रेगिस्तान में इलाके में थारपारकर गाय को यह घास बहुत प्रिय होता है तथा यह रेगिस्तान में उगता भी बहुत आसानी से है।

 इस घास को खाने के बाद गाय के दूध से जो घी प्राप्त होता है उस घी की बात ही कुछ और होती है, गौशाला में एक छोटे से हिस्से में नमूने के तौर पर इसे उगाया गया है जिसे देख कर बाप की गौशाला प्रतिनिधि मंडल ने अपनी गौशाला में अधिक से अधिक रेतीली जमीन पर इसे लगाने का निर्णय लिया। पिंजरा पोल में लगे हुये 100 से अधिक सहजन के पौधों को देखकर उत्सुकता से बाप गौशाला प्रतिनिधि मंडल ने सहजन के विषय में पूछा तब उन्हीं के साथ उपस्थित डॉ. उमेश ने बताया कि इसमें 300 प्रकार की न्यूट्रिशन वैल्यू होती है जो कि मानव जाति तथा गौमाता सबके लिये ही बहुत ही उत्तम होती है यदि इसे चारे में मिलाकर गायों को खिलाया जाता है तो इससे गायों को पूर्ण आहार की प्राप्ति हो जाती है, हर गौशाला को हजारों की संख्या में अपनी गौशाला में यह पौधे लगाने चाहिये कई किसान इस को खेती के रूप में करते है तथा इसके पत्तों को सुखाकर इसका पाउडर बाजार में बेचते हैं यह आयुर्वेद में दवा के रूप में भी काम आता है

इसकी फलियों की सब्जी भी बनती है। बाप के पशु चिकित्सालय में कार्यरत डॉ.उमेश ने  अपने साथ आये बाप गौशाला के प्रतिनिधिमंडल को बताया की गौशाला में जिस प्रकार से वर्गीकरण और गौसंवर्धन का कार्य किया जा रहा है उसका सभी गौशालाओं को अनुकरण करना चाहिए जिस प्रकार से छोटे बछड़े व बछड़ियों को, बड़ी नर तथा मादा गौवंश को, कमजोर गौवंश को, अंधे गौवंश को, विकलांग गौवंश को तथा नन्हे-मुन्ने गौवंश को अलग-अलग रखा गया है यह अनुकरणीय व सराहनीय है। पिंजरा पोल में थारपारकर गौवंश के संवर्धन का कार्य करने हेतु जिस प्रकार से थारपारकर नंदी तैयार किये जा रहे है बाकी गौशालाओं को भी जैसलमेर के चांदन के पास स्थित थारपारकर केंद्र से छोटे नंदी लाकर उन्हें तैयार किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में नस्ल सुधरें। ग्यारह करोड़ परिवारों तक गाय के गोबर से बने दीपक पहुंचाने के लिये राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के कामधेनु दीपावली अभियान पर बातचीत की गई तथा राजलदेसर गौशाला से दीपक मंगवा कर यहां वितरित करने की योजना के संबंध में पिंजरा पोल ने बताया तथा बाप की गौशाला प्रतिनिधियों को भी इसके लिए प्रेरित किया। बाप गौशाला के अध्यक्ष धुड़चंद कोठारी ने पिंजरा पोल कार्यकारिणी का आभार व्यक्त किया।

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