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परीक्षार्थियों के लिए संजीवनी बना व्हाट्स एप्प ग्रुप

Bap News : अशोक कुमार मेघवाल, फलोदी दूसरा दशक से जुड़ी राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की किशोरियों के लिये कोरोना काल मेें व्हाट्स एप्प ने संजीवनी ...

Bap News : अशोक कुमार मेघवाल, फलोदी

दूसरा दशक से जुड़ी राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की किशोरियों के लिये कोरोना काल मेें व्हाट्स एप्प ने संजीवनी बूटी का काम किया है।  


दूसरा दशक द्वारा बनाये गये व्हाट्स एप्प ग्रुप में राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की 34 किशोरियां जुड़ी हुई है, पिछले वर्ष अक्टूबर में शुरू किये गये 4 माही आवासीय- गैर आवासीय शिक्षण शिविर में 10 वीं की 48 एवं 12 वीं की 8 किशोरियां पढ़ाई कर रही थी, इन 56 में से 44 किशोरियां आवासीय व्यवस्था का उपयोग करती थी। वैश्विक महामारी कोरोना के फैलने पर सरकारी गाईड लाईन की पालना करते हुए शिविर को मार्च माह में स्थगित कर दिया गया था। लॉकडाउन के दौरान दूर दराज की गांवों में रह रही किशोरियों को शैक्षिक सहयोग करना दूसरा दशक के लिए एक चुनौती था। किशोरियों को घर बैठे शिक्षण कार्य करवाने के उद्देश्य से एक व्हाट्स एप्प ग्रुप बनाने का निर्णय लिया गया। परियोजना निदेशक मुरारीलाल थानवी बताते है कि हमें इस बात का अंदाजा था कि सभी लड़कियों के पास स्मार्टफोन नही होगा और नेटवर्क की समस्या भी आयेगी। अधिकतर किशोरियों के पास अपना फोन नही था उन्होंने अपने भाई, माता -पिता के फोन उपयोग किया,इस प्रकार शिविर की करीब 60 प्रतिशत किशोरियां इस ग्रुप में जुड़ी।

लाॅकडाउन के दौरान किशोरियां घर रहते हुए अपनी पढ़ाई निरन्तर जारी रखे तथा जो पढ़ा है उसको भूले नहीं इसके लिए प्रशिक्षिकाओं कंचन थानवी, शैलजा व्यास, नीलम रानी ने हिन्दी, गृह विज्ञान, चित्रकला, डाटा एन्ट्री, समाज शास्त्र, भारतीय संस्कृति एवं विरासत, सामाजिक विज्ञान, इतिहास आदि विषयो के 150 से अधिक प्रश्न -पत्र तैयार कर ग्रुप में भेजे जिन्हे किशोरियां हल कर ग्रुप में भेजती। इन प्रश्न-पत्रों को प्रशिक्षिकाएं उन्हे डिजिटल तरीके से चैक करके पुनः ग्रुप में भेजती इससे किशोरियों का हौसला बढ़ता और वे एक दूसरे से सीखती भी रही। बुधवार को ओपन स्कूल की परीक्षाएं सम्पन्न हो गई । फलोदी कार्यालय में एकत्र हुई शिविर की किशोरियों ने दूसरा दशक का आभार व्यक्त किया, दस साल पहले पढ़ाई छोड चुकी यास्मीन ने कहा कि लाॅकडाउन लगा तो मैंने उम्मीद छोड़ दी थी कि अब मैं पढ़ पाऊंगी लेकिन व्हाट्स एप्प ग्रुप बनने से मुझे बहुत फायदा पहुंचा, मैं पढ़ पाई और पास भी हो जाऊंगी। नैय्यर का कहना था कि इस ग्रुप में प्रत्येक विषय के सवाल-जवाब करना निरन्तर जारी रहा जिन किशोरियों के पास किसी विषय की किताब नहीं थी उन्हे भी इस ग्रुप से मदद मिली। कोरोना महामारी से कैसे बचाव करें इसके बारे में भी जानकारी मिली नैयर ने 14 बरस पहले पढाई छोड़ दी थी। पूजा ने बताया कि वह व्हाट्स एप्प ग्रुप से जुड़ नहीं पाई स्मार्टफोन उसके भाई के पास था वो 2 -3 दिन में घर पर काम से लौटता तो मैं उसके फोन से शिक्षिकाओं से व्यक्तिगत संपर्क कर लेती थी वे मुझे भाई के फोन पर सामग्री भेज देतीं थी, प्रश्नों को हल कर भी भेजती। विजयश्री जोशी, शकीला, वर्षा कल्ला, सरोज जटिया, सपना राजपुरोहित, भावना माली, सोनू व्यास आदि ने भी विचार व्यक्त किये। अनलाॅक के दौरान प्रशिक्षिकाओं द्वारा कोरोना गाईड लाईन को ध्यान में रखते हुए कल्याणसिंह की सिड, मालम सिंह की सिड, चारणाईं, जाम्बा, देदासरी, कानासर, रावरा, शेखासर, बाप, अखाधन्ना, रिण मलार,जागरिया, जैमला आदि गांवों तथा फलोदी कस्बे में किशोरियों के घर -घर जाकर व्यक्तिगत शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान किया। कल्याण सिंह की सिड्ड गांव की किशोरियां सुन्दर व सुमन की मम्मी राधा का कहना है कि मैंने पहली बार ऐसे जागरूक शिक्षक देखे है जो बच्चों को पढ़ाने के लिये चौबीसों घण्टे फोन पर तैयार रहे और घर आ कर भी इनकी पढ़ाई को चैक किया,अनलॉक के दौरान किशोरियों के लिए बाप व फलोदी में गैर आवासीय शिविरों का भी आयोजन किया गया इस दौरान उन्हे कोरोना से बचाव हेतु भी जानकारी दी गई।

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