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तृतीय श्रेणी अध्यापकों का पदस्थापन यथावत रखने की मांग

बाप न्यूज़ : अशोक कुमार मेघवाल | राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ उप शाखा फलोदी के अध्यक्ष रेंवतलाल लीलावत ने बताया कि राजस्थान उच...

बाप न्यूज़ : अशोक कुमार मेघवाल | राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ उप शाखा फलोदी के अध्यक्ष रेंवतलाल लीलावत ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर खंडपीठ द्वारा पारित निर्णय के संबंध में बुधवार को संगठन के प्रदेशाध्यक्ष मूलचंद गुर्जर एवं प्रदेश महामंत्री शंभूसिंह मेड़तिया ने प्रदेश के शिक्षामंत्री को ज्ञापन भेजकर एडिशनल तृतीय श्रेणी शिक्षकों का पदस्थापन यथावत रखने की मांग की है। 

लीलावत ने बताया कि तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2016 एवं-2018 की भर्ती में सैकड़ो तृतीय श्रेणी अध्यापकों की नियुक्ति राज्य सरकार ने विज्ञप्ति में अतिरिक्त विषय को मान्य मानकर की थी। उच्च न्यायालय में दायर परिवाद में फैसला शिक्षको के खिलाफ आने पर ढाई वर्षों से राजकीय सेवा में कार्यरत अतिरिक्त अंग्रेजी विषय से नियुक्ति प्राप्त सैकड़ों तृतीय श्रेणी अध्यापकों की नौकरी जाने का भय पैदा हो गया है। इन शिक्षकों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार हुई थी। जिसमे हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी आदि विषय भी शामिल थे, जबकि केवल अंग्रेजी अतिरिक्त विषय पर ही यह याचिका दायर हुई है। एडिशनल के आधार पर द्वितीय श्रेणी अध्यापको की नियुक्ति भी राज्य सरकार ने की है, एडिशनल के आधार पर तृतीय श्रेणी से द्वितीय श्रेणी में अध्यापको की पदोन्नति भी राज्य सरकार द्वारा वर्षो से की जा रही है। इन शिक्षकों की नियुक्ति के 2 वर्ष बाद अतिरिक्त अंग्रेजी विषय से नियुक्त समस्त तृतीय श्रेणी अध्यापकों का स्थायीकरण राज्य सरकार ने कर दिया है। निदेशक प्रांरभिक शिक्षा बीकानेर द्वारा गठित समकक्षता निर्धारण समिति ने भी अतिरिक्त विषय को मान्य डिग्री माना है। भर्ती के नियमों का निर्धारण राज्य सरकार ही करती है भर्ती के नियमो में एडिशनल डिग्री को मान्यता है। राज्य सरकार के विश्वविद्यालयो में भी बीए की एडिशनल डिग्री करवाई जाती है। यह 3 + 1 वर्षीय डिग्री है जिसे स्नातक में एक अतिरिक्त विषय जोड़ने के लिये किया जाता है। इसलिये संगठन की मांग है कि एडिशनल अंग्रेजी से नियुक्त तृतीय श्रेणी अध्यापको के साथ न्याय करते हुए इनका पदस्थापन यथावत रखा जाये।

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